मोहब्बत ए वतन - लेखनी प्रतियोगिता -20-Jan-2024
मोहब्बत ए वतन
मैंने उसकी जैसी मोहब्बत निभाने वाला
कोई दूसरा नहीं देखा
ना जाने कौन सा जुनून है
जो उसे चैन से सोने नहीं देता
बर्फीली चादर ओढ़ के रहता है
सर्द रातों की तनहाई में भी वो अकेला नहीं होता
कहते हो तुम जिसे जमीऩ की गर्त
वो उसे खुद से जुदा होने नहीं देता
उसकी राइफल से निकली गोली काम तमाम कर देती है
वो दुश्मन को पलटने का मौका नहीं देता
वो खड़ा है सरहद पर ताकि देशवासी चैन की नींद सो सके
क्या फर्क पड़ता है अगर वो कई रातें नहीं सोता
जिस्म क्षत विक्षिप्त होता है कई बार
पर उसकी वर्दी पर कोई दाग़ नहीं होता
सरजमीं का कर्ज चुकाने को हमेशा तैयार है रहता
सर्वत्र न्योछावर करने में कभी पीछे नहीं होता
होगी दुश्मन की नफरी कई सौ गुना
वो अकेला ही किसी फौज से कम नहीं होता
उसके बलिदानों की कीमत कोई क्या चुकाएगा
वो तिरंगे में लिपटा हुआ किसी फ़रिश्ते से कम नहीं होता
जो अपना फर्ज निभाने को छोड़ गया है पीछे कई जिंदगानीयां
जमीऩ पर उसके जैसा कोई दूसरा नहीं होता
गर्व है हमें अपने हर सैनिक पर जो अपने रहते
दुश्मन को तिरंगे की परछाई भी छूने नहीं देता।
🙏🙏🙏🙏🙏
दिलावर सिंह
# प्रतियोगिता हेतु
Reyaan
22-Jan-2024 01:03 AM
Nice
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Khushbu
21-Jan-2024 11:23 PM
Nice one
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Sushi saxena
21-Jan-2024 09:43 PM
V nice
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